17 फ़रवरी 2018

सच है : अयोध्या में हिंदू करा रहे मस्जिद निर्माण

हिंदू आतंकवादी मुस्लिम आतंकवादी

इस तरह के राजनीतिक शब्द जालों के बीच उसी अयोध्या में एक सकारात्मक खबर है परंतु इस पर सन्नाटा भी है। अयोध्या के हनुमानगढ़ी मंदिर के जमीन पर 92 साल पुरानी शाह आलम मस्जिद को जर्जर होते देख प्रशासन ने संभालने अथवा तोड़ देने का नोटिस दिया। 

क्योंकि यह मस्जिद हनुमानगढ़ी हिंदू की जमीन पर थी इसलिए इसका निर्माण नहीं हो सकता था। मुस्लिम लोगों ने महंत ज्ञानदास से संपर्क किया और ज्ञानदास ने मस्जिद के जीर्णोद्धार की इजाजत दे दी और शाह आलम मस्जिद का निर्माण हो रहा है।

 हद तो यह है कि इस मस्जिद के निर्माण में गरीब-गुरबों मुसलमानों ने ही सीमेंट, ईंट और पैसे चंदे के रुप में दिए हैं बड़े-बड़े बोल बोलने वाले मुस्लिम पर्सनल ला अथवा ओवैसी जैसे बड़बोला ने कोई सहयोग नहीं किया..


भारत की धर्मनिरपेक्षता यही है। राजनीतिज्ञ हमेशा से इस भारत को मार देना चाहते हैं परंतु आम जनमानस इसे कभी मरने नहीं देगा भारत जिंदाबाद है जिंदाबाद रहेगा..

14 फ़रवरी 2018

ब्रेकिंग न्यूज़: वेलेंटाइन डे पर भगवा बुर्का लॉन्च..

(व्यंग्य बाय अरुण साथी)
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मघ्घड़ चाचा परेशान हैं। पूछ रहे हैं कि वैलेंटाइन क्या होता है मरदे! बहुत लोगों से पूछा, किसी ने कुछ, किसी ने कुछ जवाब दिया। तभी रास्ते में खिलावन सिंह के कुपुत्र मिल गया। लफूव्वा। हाथ में डंडा के ऊपर झंडा लगा हुआ था। पूछ लिए
"वैलेंटाइन के दिन झंडा लगा डंडा लेकर कहां जा रहे हो बेटा।"

बोला "बाबा आप नहीं ना समझ पाइयेगा। आज हम उसको सोंटने जा रहे हैं जिसने मेरी गर्लफ्रेंड को पटा लिया है। कहीं भी मिलेगा आज उसको सोंट देंगे।"
फिर रास्ते में फुलझड़ी मिल गई। फुलझड़ी काकी को मघ्घड़ चाचा खूब चाहते थे। आंखों ही आंखों में इशारे हो गए परंतु जुबान आज तक नहीं खुली। अब अंतिम पड़ाव पर उन्होंने पूछ लिया।
"फुलझड़ी यह वैलेंटाइन क्या होता है।"

काकी शरमा गई, बोली
"जवानी में तो पूछ ना सके, पूछते तो आज हम आपके और आप हमारे होते। इस उम्र में पूछने से क्या फायदा। खैर पूछे हैं तो बता देती हूँ।  इसको प्रेम दिवस भी कहते हैं और एक गुलाब देकर किसी को अपना बना सकते हैं।"
फिर क्या था चाचा भड़क गए, बोले 'इतने साल तक अपना दिल देकर तुमको अपना नहीं बना सके फिर एक गुलाब से कोई अपना कैसे बन जाएगा।"
काकी भड़क गई बोली
"बुद्धू का बुद्धू ही रह गए। अब अपने जमाने की बात नहीं है। आजकल गुलाब देकर किसी को अपना बनाने का मतलब वैसा ही है जैसे दस का नोट देकर कोका कोला खरीदे, ढक्कन उड़ाया और गटक गए। समझ में आया। स्प्राइट जैसा सब क्लियर है और आजकल के नौजवान यही सब करते हैं। वही ठंडा पीते हैं जिसमें कहा जाता है डर के आगे जीत है।
खैर, मघ्घड़ चाचा भी रास्ते में एक गुलाब का फूल तोड़ लिए, सोचे इतने दिन तक तो चाची को कुछ दिया नहीं आज गुलाब दे देते हैं। गुलाब हाथ में लेकर मंद मंद मुस्कुराते हुए वह जा रहे थे तभी रास्ते में बजरंग सेना मिल गई। लाठी और झंडा साथ-साथ। चाचा के हाथ में गुलाब देखकर फुलझड़ी का भतीजा भड़क गया। वह सोच लिया कि जरूर इसमें उनकी काकी को ही प्रपोज किया होगा। खैर फिर क्या था। बजरंग सेना आपस में बातचीत किया और चाचा को ही धो दिया। चाचा पूछते रहे कि क्यों धो रहे हो पर जवाब किसको पता था। लाल गुलाब देखकर भगवा झंडा वाले वैसे ही भड़कते हैं जैसे लाल कपड़ा देखकर सांढ़!
मार कुटाई के बाद चाचा जा रहे थे तभी रास्ते में मौलाना फैजुल मिल गए। पूछ लिया,
"क्या हुआ चाचा, हाथ मे लाल गुलाब, माथे पर लाल लाल लहू, किस से भिड़ गए। इस उम्र में रोज दीजिएगा तो पिटाई तो होगी।"
चाचा क्या कहते, बस इतना कहें,  "कई दशक के बाद रोज देने की हिम्मत की और डंडा धारी फौज ने पीट दिया।"
"ओह, अच्छा बजरंग सेना वाले थे। ठीक ही किया। हम तो कहते ही हैं कि औरतों को बुर्का में रहना चाहिए। भला औरतें नुमाइश की चीज है। घर के चारदीवारी के अंदर ही वो रहने की चीज़ है और नहीं तो फिर बुर्का में रखिए। यह सब बखेड़ा ही नहीं होगा पर आप लोग विरोध करते हैं। स्वतंत्रता, स्वाभिमान, स्वावलंबन! आप ही लोग के डिक्शनरी में यह सब होता है। हमारे डिक्शनरी में तो बुर्का, तीन तलाक, हलाला यही सब है।"
तभी उधर से परमेश्वर पंडा आ रहे थे। मौलाना की बात सुनकर वैसे तो भड़क जाते थे परंतु आज समर्थन कर दिया।
"ठीक कहते हैं मौलाना साहब। स्त्री कैदखाने में ही रहनी चाहिए। हम लोग भी अब मांग करेंगे भगवा बुर्का की। आप लोगों के बुर्का में आंख के आगे थोड़ी सी जगह भी रहती है हम तो कहेंगे कि वहां भी जगह नहीं रहनी चाहिए। स्त्री भला कैसे किसी को देख सकती हैं। पूरी तरह से आंखों पर पट्टी होगी। अरे किस घर में दो चार मर्द नहीं होते हैं। जहां उसको जाना होगा, उंगली पकड़कर ले जाएगा तभी इस संसार में कल्याण होगा। अभी तो सब जगह अपनी सरकार है। इस मुद्दे को लागू करा कर ही दम लूंगा। और फिर भगवा बुर्का के लिए देशभर में जबरदस्त आंदोलन हुआ। देश और राज्य की सरकारें आंदोलनकारियों के आगे घुटने टेक दिए। आखिर वोट बैंक का सवाल था। अगले दिन न्यूज चैनलों और अखबारों की हेडलाइन थी भगवा बुर्का कानून पास। नहीं पहनने पर आजीवन कारावास की सजा।
तथास्तु, हरि ओम, हरि ओम, हरि ओम..

13 फ़रवरी 2018

नपुंसक समाज को लिंग दिखता एक नपुंसक

नपुंसक समाज को लिंग दिखाता एक नपुंसक

दिल्ली की खचाखच भरी  एक बस में जब एक नपुंसक आदमी नपुंसक समाज के सामने अपना लिंग निकालकर उसका प्रदर्शन करता हो और एक दिलेर छात्रा इसका वीडियो बनाकर ट्विटर पर सार्वजनिक करती हो तब इस बात को समझ लेना चाहिए कि आदिम युग से दुर्गा और महिषासुर कि पुनरावृत्ति आज भी होती रही है। वैसे तो उस बस में बहुत सारे लोग होंगे पर निश्चित रूप से उसमें कोई जिंदा आदमी सफर नहीं कर रहा होगा। लाशों के बीच एक जिंदा लाश भी थी जो अपनी बच्ची की उम्र के एक बच्ची को अपना लिंग दिखा कर अपनी राक्षसी मनोवृत्ति को तुष्ट कर रहा था।

दरअसल यह बस और इसकी यह घटना विकृत पुरुष समाज के मानसिक विकृति का एक आईना है जो सदियों से महिलाओं के साथ इसी तरह से पेश आता रहा है। बेटियां कैसे यह सब झेल कर आगे बढ़ती है यह उसके अदम्य साहस का ही परिचायक है।

इसी बस की घटना ने यह भी साबित किया की बेटी वास्तव में दुर्गा का रुप होती है और जब भी महिषासुर दानव अपनी विकृति का प्रदर्शन करता है तब उस का मान मर्दन करने, उसके रक्तबीज को खत्म करने के लिए दुर्गा अवतरित होती है। वही बेटी काली के रूप में भी राक्षसों के रक्तबीज का नाश करती है। दिल्ली के बस की यह घटना इस बात का भी धोतक है कि हम जिसे समाज कहते हैं दरअसल वह जिंदा लाशों का कब्रिस्तान है और इन जिंदा लाशों के कब्रिस्तान के पीछे हम सब सड़ांध पर केवल अपनी नाक पर रूमाल रख लेते हैं।

जिंदा लाशों के बीच कहीं-कहीं, कोई-कोई जिंदा आदमी भी दिखता है और वही जिंदा आदमी संभावना है इस बात का कि आज ना कल हमारा समाज भी जिंदा समाज बनेगा।

और गुलाटी जैसी बेटी हमें अक्सर जिंदा लाश साबित करने का साहस दिखाती रही है।

पर अफसोस इस बात का है कि इतनी शर्मनाक घटना के बाद तथाकथित अदम्य साहसी और पराक्रमी सरकार अभी उस महिषासुर को गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

और तो और इस घटना पर उस महिषासुर की गिरफ्तारी ही सजा नहीं है बल्कि चौबीस घंटे के अंदर उसे स्पीडी ट्रायल के जरिए स्पेशल कोर्ट में सजा सुनाई जाए तभी एक दुर्गा रूपी बेटी के अदम्य साहस का हम सम्मान कर सकेंगे वरना केवल सोशल मीडिया पर उस दुर्गा रूपी बेटी को शाबाशी देने से यह एक औपचारिकता भर ही साबित हो कर रह जाएगी...

08 फ़रवरी 2018

कड़ी मेहनत से मिलती है सफलता

कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई से मिलती है सफलता- पुलिस अधीक्षक अश्वनी कुमार

बिहार कौशल विकास मिशन के बच्चों के बीच किया पुरस्कार वितरण

बरबीघा।

बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा संचालित श्रद्धानंद स्मारक कुशल युवा कार्यक्रम केंद्र पर झारखंड के खूंटी जिला पुलिस अधीक्षक अश्विनी कुमार ने बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने और सफलता पाने का गुरु मंत्र दिया। वे बरबीघा के सामाचक में रहकर पढ़ाई की है। इस मौके पर अश्वनी कुमार ने कहा कि कठिन परिश्रम और लगन के साथ नियमित पढ़ाई से ही सफलता मिलती है।

साथ ही अश्वनी कुमार के द्वारा कुशल युवा केंद्र के क्विज प्रतियोगिता में विजई बच्चों के बीच पुरस्कार वितरित भी किया।

इस अवसर पर आयोजित समारोह में बोलते हुए अश्वनी कुमार ने कहा कि बरबीघा के प्राथमिक विद्यालय सामाचक से पढ़ाई प्रारंभ की और झोला लेकर जमीन पर बैठकर शिक्षक रामनरेश सिंह के द्वारा पढ़ाई सीखी और वही बुनियाद आज सफलता तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि शेरपर मध्य विद्यालय से पढ़ाई करने के क्रम में प्रधानाध्यापक गीता सिंह के द्वारा दिया गया गुरु मंत्र उनके जीवन में दूर तक काम आया। गीता बाबू सर्वज्ञ शिक्षक थे और हिंदी के क्लास में सामान्य विज्ञान से लेकर सामान्य ज्ञान तक की बातें सिखा दिया करते थे। साथ ही साथ उन्होंने अपने शिक्षक रामशकल साहू, अर्जुन पंडित, अरुण त्यागी और संजय प्रसाद का भी जिक्र कर बच्चों को लगन और मेहनत से पढ़ने का गुरु मंत्र दिया।

इस अवसर पर उनके द्वारा श्रद्धानंद स्मारक कुशल युवा केंद्र के बच्चों को कुशल युवा कार्यक्रम क्यूज़ प्रतियोगिता सफलता हासिल करने पर पुरस्कार प्रदान किया गया। प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार मुकेश कुमार, चंदन कुमार रंजना कुमारी, द्वितीय पुरस्कार अर्णव कुमार, रंजना कुमारी, जीशान अली को प्रदान किया गया जबकि तृतीय पुरस्कार अंजनी कुमार, राज कुमार, संजना कुमारी और संदीप कुमार को प्रदान किया गया।

इस अवसर पर समारोह का संचालन संस्था के निदेशक अरुण साथी ने किया जबकि अतिथि का स्वागत राजू सिंह के द्वारा किया गया। मौके पर शशांक कुमार, स्वराज हिंद, रोहित कुमार, लवली साव, भाजपा जिला अध्यक्ष संजीत प्रभाकर, देव कुमार पांडे, नीतिनजय कुमार, बरुन सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

25 जनवरी 2018

क्या भारत को पाकिस्तान बनाने का प्रयास हो रहा! करनी सेना के बहाने एक विमर्श

फ़िल्म पद्मावत का विरोध कर रहे करनी सेना ने जब गुरुग्राम में स्कूल बस पे पथराव किया तो बच्चे डर से सहम कर सीट के नीचे दुबक रोने लगे। करनी सेना अपनी दबंगई दिखा रही है। इस दबंगई को सत्ता का खामोश संरक्षण भी है।

यह गुंडागर्दी तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने फ़िल्म के प्रदर्शन का आदेश दे दिया है। यानी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा और ताकतवर साबित करने का ही यह पर्दशन है।
यह तब जबकि उनके ही सेंसर बोर्ड ने फ़िल्म को काट छाँट कर दिया है। और तो और फ़िल्म को देखने वाले बौद्धिक वर्ग ने फ़िल्म को राजपूतों के मान सम्मान को बढ़ाने वाला बताया है। फिर दिक्कत कहाँ है।

दिक्कत है राजनीति। कट्टरपंथी साबित करने होड़। कट्टरपंथी बन डर पैदा करने की कोशिश। दिक्कत है वोट बैंक की राजनीति करने वालों की खामोशी। दिक्कत है बड़े बड़े नेताओं को बिगड़े बोल। दिक्कत है संविधान की शपथ लेने  वालों का संविधान से इतर कार्य करना।

कुछ लोग कहते है मुसलमानों के खिलाफ फ़िल्म बना के कोई दिखा दे! मुसलमानों के इस तरह के उपद्रव पे क्यों सब खामोश रहते है। यूपी के कमलेश प्रकरण के बाद पूरे देश मे मुसलमानों ने तांडव किया। बंगाल के मालदा आग के हवाले कर दिया। तब खामोशी क्यों थी। वास्तव में वोट के लिए कट्टरपंथी का तुष्टीकरण की राजनीति ही इसका मूल है। दो धुर्वीय राजनीति के एक इस पक्ष तो दूसरा दूसरे पक्ष में है। पहले एक ने ध्रुवीकरण किया अब दूसरा कर रहा।

खैर, जब धर्म के नाम पे फ्रांस में शर्ली हेब्दो पत्रिका के ऑफिस में घुस कई पत्रकारों की हत्या की गई तो दुनिया ने इसे निर्मम कहा। हाय, एक कार्टून से धर्म और ईश्वर डर गए। इसी तरह तालिबान, आईएस सरीखे आतंकवादी संगठनों की बर्बरता पे पूरी दुनिया हाय हाय करती है।

परंतु धर्म के नाम के पर मुसलमानों का एक बड़ा वर्ग उन कट्टरपंथियों का समर्थन करता है। कट्टरपंथ का मूल यही है। आज अपने देश भारत को कुछ लोग इसी दिशा में ले जाने का कुत्सित प्रयास कर रहे है। इसी प्रयास का परिणाम राजस्थान के राजसमंद में एक मुस्लिम युवक को जिंदा जलाया जाना है और हत्यारे के खाते के लाखों राशि दान देना है।


कट्टरपंथियों के इस ध्रुवीकरण को वोट की राजनीति करने सह देंगे ही, देते ही रहे है। धर्म की आग ऐसी आग है जिसमें हम भूख, बेरोजगारी, मंहगाई सब भूल जाते है। आज भूल गए है। पर याद रहे जिस दिशा में भारत को ले जाने का प्रयास किया जा रहा उस दिशा में भारत का "सर्व धर्म समभाव" मानस कभी नहीं जाएगा। हम कभी नहीं चाहेंगे कि भारत सीरिया, नाइजीरिया, पाकिस्तान बने। करनी सेना हो या मोहम्मदी सेना। देश को अपने कुकृत्य से बदनाम कर रहे है। देश कभी माफ नहीं करेगा। आज सेकुलर होना गाली बताया जा रहा फिर कट्टरपंथी होना क्या है..आप सोंचिये..!

23 जनवरी 2018

जंगलराज: बिहार के नालंदा में घर पर गोलीबारी कर विधवा को भगाया। घर पर कब्जा किया। भीख मांग भर रही पेट। सर्द रात में सड़क पर बीत रहा जीवन

दबंगों ने घर पर गोलीबारी कर घर से भगाया, घर पर किया कब्जा
कड़ाके की ठंड में सड़क पर रह रही है वृद्धि और विकलांग परिवार
भीख मांग कर भर रहे पेट
नालंदा जिले के सरमेरा थाना के छोटी मलामा का मामला
शेखपुरा/नालंदा
अरुण साथी
नालंदा जिला पुलिस को खुलेआम चुनौती देते हुए दबंगों ने एक गरीब विधवा और उसके विकलांग पुत्र के घर पे जमकर गोलीबारी की और मारपीट कर घर से भगा दिया तथा घर पर कब्जा कर लिया। मामला नालंदा जिले के सरमेरा थाना के छोटी मलामा गांव का है। घर से भागी वृद्ध महिला अपने विकलांग पुत्र के साथ बरबीघा के पटेल नगर मोहल्ले में सड़क पर एक सप्ताह से रात बिता रही है तथा भीख मांग कर खाना खा रही है। यह मानवीय और दुखद घटना होते हुए भी सरमेरा थाना पुलिस इस पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रही।
क्या है पूरा मामला
बरबीघा के पटेल नगर मोहल्ले में मोहल्ले के लोगों के द्वारा दिये गए भोजन अथवा भीख मांग कर गुजारा कर रही सुरसी देवी ने बताया कि उसी के पड़ोस में रहने वाला दबंग और कुख्यात रामबालक ढाढी का सहकर्मी रहने वाला सिझो प्रसाद के द्वारा उनके घर पर लगातार गोलीबारी की गई और उनको और उनके पुत्रों को साथ मारपीट किया गया तथा घर से भगाकर घर पर कब्जा कर लिया। सुरसी देवी ने बताया कि घर से भागने के बाद वे लोग बरबीघा के पटेल नगर मोहल्ले में सड़क पर ही रात बिता रही है।
विकलांग बलबीर भी करता है भिक्षाटन
गोलीबारी और मारपीट के डर से अपने गांव से भागा विकलांग बलवीर भिक्षाटन कर अपनी मां का भी परवरिश करता है। बलवीर दोनों पैर से पूरी तरह विकलांग है और वह बोल भी ठीक से नहीं पाता। सुरसी देवी कहती है कि उनका एक और पुत्र है धर्मवीर जिसके साथ मारपीट की गई और वह अभी तक लापता है। सुरसी देवी ने बताया कि भय से वह पुलिस के पास भी नहीं गयी है।
उधर इस संबंध में पूछे जाने पर सरमेरा थाना अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा कि थाने में इसकी सूचना नहीं दी गई है पुलिस को अभी सूचना मिली है तो इसकी जांच की जाएगी और कार्रवाई होगी।

18 जनवरी 2018

बिहार में जातीय उन्माद फैला कर मानव श्रृंखला असफल करने की हो रही साजिश..

बिहार में मानव श्रृंखला पे जातीय असर

बरबीघा में जातीय नफरत मत फैलाओ

शेखपुरा/बिहार

बिहार में दहेज प्रथा और बाल विवाह के विरोध में बनने वाले मानव श्रृंखला को असफल करने  के लिए जातीय नफरत फैलाने की गंभीर कोशिश की जा रही है। हद तो यह है कि यह कोशिश मुखिया पति जैसे सार्वजनिक जीवन में जुड़े रहने वाले जनप्रतिनिधियों के द्वारा किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला बरबीघा प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा बनाए गए WhatsApp ग्रुप में देखने को मिला। इस ग्रुप में मालदह पंचायत के मुखिया पति मधु कुमार ने मानव श्रृंखला में पिछड़े और दलित लोगों के शामिल होने पर एतराज जताते हुए लिखा कि पिछड़े और दलित जाति की बहू-बेटी ही मानव श्रृंखला में क्यों निकलती है?अगड़ी जाति की बहू-बेटी नहीं निकलती? मधु कुमार ने जातियों का नाम भी स्पष्ट रूप से लिखा।

यह बरबीघा की पवित्र धरती का अपमान है। पिछले साल बने मानव श्रृंखला में सभी जाति के लोगों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और कहीं जातिवाद नहीं दिखा। इस साल भी सभी जाति के लोग इसमें शामिल होने के लिए उत्साहित हैं क्योंकि बाल विवाह और दहेज प्रथा का असर सभी जातियों पर व्यापक रूप से पर रहा है।

बरबीघा जन्म भूमि है बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह की जिन्होंने देवघर मंदिर में पंडों का विरोध झेल दलितों का प्रवेश करा कर यह सिद्ध किया कि जातीय विद्वेष से समाज का सशक्तिकरण नहीं हो सकता।

और तो और स्वजातीय जमींदारों के विरुद्ध ही उन्होंने जमीनदारी प्रथा का सख्त कानून लाकर इसी सशक्तिकरण का प्रमाण भी दिया। कई मनीषी बरबीघा में जातीय विद्वेष को दूर करने का सतत प्रयास करते रहे जिसमें लाला बाबू, रामधारी सिंह दिनकर प्रमुख हैं। बावजूद इसके आज बरबीघा की धरती पर जातीय विष फैलाने का काम किया जा रहा है। यह घोर निंदनीय और समाज को तोड़ने वाला कदम है। समाज के बुद्धिजीवी, समाजसेवी और जागरुक लोगों को मुखर होकर इसका विरोध करना चाहिए। परंतु सरकारी लाभ उठाने वाले तो छोड़ दीजिए समाज के कथित प्रतिनिधि भी खामोश हैं जो बहुत ही चिंता का कारण है।

सच है : अयोध्या में हिंदू करा रहे मस्जिद निर्माण

हिंदू आतंकवादी मुस्लिम आतंकवादी इस तरह के राजनीतिक शब्द जालों के बीच उसी अयोध्या में एक सकारात्मक खबर है परंतु इस पर सन्नाटा भी है। अय...