28 अप्रैल 2010

Latest update after Swiss Bank has agreed to disclose the funds.


Latest update after Swiss Bank has agreed to disclose the funds& . 
Our Indians' Money - 70, 00,000 Crores Rupees In Swiss Bank
1) Yes, 70 lakhs crores rupees of India are lying in Switzerland banks. This is the highest amount lying outside any country, from amongst 180 countries of the world, as if India is the champion of Black Money. 
2) Swiss Government has officially written to Indian Government that they are willing to inform the details of holders of 70 lakh crore rupees in their Banks, if Indian Government officially asks them. 
3) On 22-5-08 , this news has already been published in The Times of India and other Newspapers based on Swiss Government's official letter to Indian Government. 
4) But the Indian Government has not sent any official enquiry to Switzerland for details of money which has been sent outside India between 1947 to 2008.. The opposition party is also equally not interested in doing so because most of the amount is owned by politicians and it is every Indian's money. 
5) This money belongs to our country. From these funds we can repay 13 times of our country's foreign debt. The interest alone can take care of the Center s yearly budget. People need not pay any taxes and we can pay Rs. 1 lakh to each of 45 crore poor families. 
6) Let us imagine, if Swiss Bank is holding Rs. 70 lakh Crores, then how much money is lying in other 69 Banks? How much they have deprived the Indian people? Just think, if the Account holder dies, the bank becomes the owner of the funds in his account. 
7) Are these people totally ignorant about the philosophy of Karma? What will this ill-gotten wealth do to them and their families when they own/use such money, generated out of corruption and exploitation? 
8) Indian people have read and have known about these facts. But the helpless people have neither time nor inclination to do anything in the matter. This is like "a new freedom struggle" and we will have to fight this. 
9) This money is the result of our sweat and blood.. The wealth generated and earned after putting in lots of mental and physical efforts by Indian people must be brought back to our country.

27 अप्रैल 2010

दहेज की आंच में जल रहा है समाज, मुंह मांगी कीमत पर बिक रहे दुल्हे।

दहेज की आंच दिन व दिन बढ़ती ही जा रही है। आलम यह कि बेटियों की शादी के लिए जूते घिसने की बात आज भी चरितार्थ हो रही हैं। दहेज को लेकर बरतुहारी करने वाले परिजन जहां कड़ाके की धूप में भी बेटियों की शादी के लिए भटक रहे हैं वहीं बेटों के बाप के पैन्तरे देख उनका हलक तक सूख रहा है। दहेज को लेकर दुल्हों की कीमत दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है और अब तो यह सामाजिक स्वीकार्य हो गई है। दहेज में जहां नौकरी बालों के भाव सातवें आसमान पर है वहीं बेरोजगार दुल्हें भी अपनी कीमत बढ़ा चढ़ा कर बसूलने में लगे हुए हैं। सबसे पहले बेरोजगार दुल्हों की बात की जाय तो जातियों के आधार पर इनकी कीमत भी अलग अलग है। जहां सवर्ण बेरोजगार दुल्हे की कीमत दो लाख से लेकर तीन लाख तक है वहीं यदि उसके पास यदि पुस्तैनी जमीन हो तो कीमत चार से पांच लाख भी जा सकती है वहीं अन्य समुदायों में बेरोजगार दुल्हे भी एक से दो लाख में िेबक रहे है। दलितों में भी दहेज का चलन बढ़ता ही जा रहा है और दिहाड़ी मजदूरी करने वालों के लिए भी अपनी बेटी की ंशादी एक समस्या बन गई है। दूसरे पैदान पर व्यापार करने वाले दुल्हे आते है जिसकी कीमत तीन से पांच लाख होती है। हलंाकि उसकी कीमत व्यापारिक स्थिति पर निर्भर करती है और यदि व्यापार अच्छी रही तो कीमत उपर भी जा सकती है। तीसरे पायदान पर कर्मचारी स्तर के तथा सिपाही दुल्हे आते है जिसकी कीमत अब चार से छ: लाख होती है। सिपाही दुल्हे की मांग हलांकि उसके उपरी कमाई को देखते हुए अधिक भी हो जाती है। उसके बाद चौथे पायादान पर अन्य शिक्षक स्तरिय तथा प्रखण्ड स्तरिय कर्मचारी की मांग भी अच्छी है और इनकी कीमत भी छ: लाख के आस पास होती है। हालत यह भी है कि निविदा पर नियुक्त दुल्हे की मांग भी बढ़ गई है और मरता क्या नहीं करता की तर्ज पर बेटी के पिता इन दुल्हों को खरीदने में भी कोेई कोताही नहीं कर रहें। यही हाल उनके दुल्हों की भी है जिसके पिता या माता नौकरी करतें है और बेटा बेरोजगार हो। छठे पायदान पर अधिकारी वर्ग के दुल्हे आते है और इस सब में यह देखा जाता है कि लड़के की उपरी कमाई कितनी अधिक होती है। जिसमें जितना अधिक कमाई का चांस होती है उसकी मांग उतनी ही अधिक है और इनकी कीमत दस लाख से पन्द्रह लाख तक जाती है। सातवें पायदान पर राजपत्रित अधिकारियों आते है और इन दुल्हों की कोई कीमत ही नहीं होती जो जितना अधिक देते है शादी उसी के साथ होती है। दहेज के इस दवानल में जहां बेटियों के बाप जल रहे है वहीं दिन व दिन बढ़ते इस विकराल दानव के दमन का कोई आस लोगों को नज़र नहीं आता।
कुछ साल पहले तक निजी कंपनियों में काम करने वाले की डिमाण्ड उतनी अधिक नहीं थी पर जैसे जैसे लोग निजी कंपनी के दुल्हे को तरजीह देने लगे है वैसे वैसे यह और विकराल होता जा रहा है। बेटियों के पिता कें लिए बेटी की शादी करने में आज जो सबसे बड़ी दिक्कत हो रही है वह यह कि दुल्हे के पिता के पास जब शादी की बात लेकर लोग जाते है तो ंअभी शादी नहीं करने की बात कह कर टरका दिया जाता है उकसे बाद शुरू होता है दौर दुल्हे के पिता को शादी के लिए राजी करने का दौर और फिर सारी उर्जा लगा कर जब उन्हें शादी कें लिए राजी किया जाता है तो उनकी फर्माइशंंंें की फेहरिस्त इतनी लंबी होती है कि उसे पूरा करने में पसीने छूट जाते है और दहेज में कटौती की बात ही नहीं आती है।

दहेज के इस विकराल रूप की वजह से जहां कन्याओं को जन्म से पहले ही मार दिया जा रहा है वहीं पुरूष और महिला अनुपात में महिलाओं की संख्या कमने का प्रभाव भी दहेज पर पड़ता नज़र नहीं आता है। कन्या भ्रुण हत्या जैसे जधन्य अपराध करने वाले मां-बाप जहां दहेज को ही तर्क बना रहें है वहीं समाजिक स्तर पर इसके लिए कोेई पहल होती नज़र नहीं आती।


26 अप्रैल 2010

कि फिर आऐगी सुबह



हर सुबह एक नई उम्मीद लाती है


खब्बो से निकाल


हमको जगाती है




अब शाम ढले तो उदास मत होना


उम्मीदों कों सिरहाने रखकर तुम चैन से सोना


कि फिर आऐगी सुबह


हमको जगाऐगी सुबह


रास्ते बताऐगी सुबह


उम्मीदों कें सफर को मंजिल तक पहूंचाऐगी सुबह.................

24 अप्रैल 2010

आई. पी. एल. के नामकरण सन्स्कार मे आपका स्वागत है

आई. पी. एल. के नामकरण सन्स्कार मे आपका स्वागत है.
इन्डियन पन्गा लीग.इन्डियन पोलिट्कल लीग.
इन्डियन प्रोफ़ेशनाल लीग. आगे जारी रखीए

अब तक का सबसे बड़ा खुलासा.

मिडिया आज कल सबसे बड़ा खुलासा करने लगी है। ऐसा खुलासा जो एक्सकुलिसिव होती है। दशZक देखने के लिए ललायित होते है पर खुलासा क्या होतेा है तो इंकम टेक्स की रिर्पोट का हवाल देते हुए आधे घंटे का खुलास किया जाता है। बताया जाता है कि कैसे मोदी आईपीएल के सटटेवाजी में संलिप्त है। रिर्पोट इंकमटेक्स का और खुलासा मिडिया का। कितना कमीनापन है। मिडिया की अपनी कोई औकात नहीं होती क्या। खुलास तभी होती है जब पुलिस या कोई सरकारी तन्त्र की कोई रिपोर्ट आती है। ललीत मोदी प्रकरण पर आज से पहले मिडिया मोदी का गुणगान करते नहीं थकती थी। आइपीएल को देश की सबसे बड़ी उपल्बधी बताते थे, आज क्या हुआ। आज इसमें थरूर,ंशरद पवार और पटेल को जोड़ा जा रहा है कल कहां थे। मिडिया को खोजी कहा जाता था तो आज दूसरे की खोज पर वाहवाही क्यों लूटतें है। खुलासा ही करना था तो आज से पहले क्यों नहीं किया। सारे मामलों में मिडिया कहीं न कहीं से संचालित होती नज़र आती है। आईपीएल का मामला हो या सानीया की शादी का या फिर इच्छाधारी बाबा का, मिडिया के पास दिखाने के लिए कुछ नहीं होता बस तथ्यों को तोड़ जोड़ कर समाचार बनाए जा रहे है और आम आदमी के सारोकार की बातें गौन होती जा रही हैंं। कल जिसका गुणगान करते नहीं अघाते थे आज उसकी की बखीया उघेड़ रहें है तो क्या इसमें मिडिया की विश्वसनियता पर सवाल नहीं उठता। आज भी चैनलों पर बाबाओं का प्रवचन ऐसे चलता है जैसे वही भगवान हो। कई विशेषणों के साथ उनका फलैश किया जाता है, क्या इन बाबाओं की जांच होती है। कल यदि यही किसी काण्ड में फंसते है तो वह चैनग गुंनहगार नहीं पर यहां तो चलन सदियों से है कि उंगली सदैव दूसरों की ओर ही उठानी है भले ही उसी समस कुछ उंगली अपनी ओर भी होती है।


23 अप्रैल 2010

सामस का विष्णुधाम बनेगा पर्यटक स्थल, राज्य सरकार देगी विकास के लिए पच्चास लाख

विष्णु की भारत की सबसे बड़ी प्रतिमा स्थल को पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकसित किये जाने को लेकर पच्चास लाख़ की राशि राज्य सरकार के द्वारा दिया दिये जाने पहल की गई है। सरकार की इस पहल की वजह से भगवान के विष्णु की सबसे उंची प्रतिमा स्थल को पर्यटक केन्द्र के रूप में विकसित किए जाने का कार्य किया जा सकेगा। ज्ञातव्य हो कि शेखपुरा जिले के बरबीघा प्रखण्ड स्थित सामस गांव में 1992 में तलाब की खुदाई के क्रम में भगवान विष्णु की आदमकद प्रतिमा निकली थी। प्रतिमा की उंचाई सात फिट छ: इंच है जिसकी वजह से पूजी जाने वाली यह भारत की सबसे उंची भगवान विष्णु की प्रतिमा है। प्रतिमा को जानकारों ने पालकालिन बताया। यह प्रतिमा ग्रेनाईट के काले पत्थर से बनी हुई है। जानकार बातते है कि सामस गांव में राजा मान सिंह का कोई सम्बंध था और यहां किला भी था। मुगलों के आक्रमण कें बाद प्रतिमा को खण्डित कर दिया गया जिसकी वजह से सामस गांव में खण्डित प्रतिमा कई है जिसमें प्राचीन प्रतिमा बनाने की उत्कृष्ट कला की झलक मिलती है।
प्रतिमा को तल
बरबीघा स्थित
भब से निकाल गांव के लोगों ने तालाब के बीचों बीच ही स्थापित कर मन्दिर बनाने का कार्य शुरू कर दिया और धीरे धीरे मन्दिर को भव्य रूप देने का कार्य किया जाता रहा और फिर बाद में राजगीर प्रवास के क्रम में बिहार के मुख्यमन्त्री नीतीश कुमार ने सामस गांव आकर विष्णु की प्रतिमा स्थल का निरीक्षण किया और इसे पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकासित किए जाने का आश्वासन दिया था जिसकें अनुरूप पच्चास लाख़ की राशि से इसके विकास का कार्य किया जाएगा। तलाब के बीच में मन्दिर होने की वजह से इसे जलमन्दिर के रूप में विकसित किए जाने की योजना है। बाद में सामस गांव कें ही अरविन्द कुमार मानव के प्रयास से धार्मिक न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य किशोर कुणाल यहां आए और प्रतिमा को देख कर इसके विकास के लिए प्रयास तेज कर दिया परिणामत: इस स्थल को पर्यटक क्षेत्र के रूप में विकासित किए जाने का काम अब हो सकेगा। इस संबध्ं ामें जानकारी देते हुए मन्दिर न्यास समिति के अध्यक्ष डा. के. एम. पी. सिंह ने बताया कि मन्दिर के निर्माण को लेकर प्रयास तेज किया जाएगा।


18 अप्रैल 2010

``भारत एक कृषि प्रधान देश है, यहां क्रिकेट की फसल लहलहाएगी´´

रेडियो मिर्ची पर आईपीएल का 
विज्ञापन इस तरह से आता है 

``भारत एक कृषि प्रधान देश है
यहां क्रिकेट की फसल लहलहाएगी´´

हां भाई.... 

अब हमलोग बैड-बॉल खाऐगें
स्टेडियम की पीच पर
चीयर्स गर्ल के साथ चौकोें-छक्कों से नहाएगें 
अपने मोदी डायमण्ड का 
टॉयलेट सीट बनाएगें 
तेन्दूलकर-धोनी अब भगवान कहलाएगें
मन्दीरों में ये पूजे जाएगें
बेचारा आम आदमी
आईपीएल महायज्ञ में
गांधी छाप चढ़ावा
दनादन चढ़ाऐगें 
फुटपाथ पे पेट पकड़ 
रामदीन और धनश्याम सो जाएगें



11 अप्रैल 2010

पुरूष की जगह महिला तो महिला की जगह पुरूष की लगायी तस्वीर, मतदाता सूची बनाने वाली संस्था कर रही है जानबुझ कर परेशान, बीएलओ परेशान, गांव में जाने से डर रहे बीएलओ।

बिहार सरकार के निर्देश के आलोक में जिला प्रशासन का पूरा महकमा कई बैठकें आयोजित कर फोटो मतदाता सूची सुधारने को लेकर परिश्रम करते है और बच्चों की शिक्षा वाधित कर इस काम को मुकम्मल करने की कवायद होती है पर लगातार दो तीन सालों में सुधार की इस प्रक्रिया में सुधार होता ही नही। आलम यह कि जिस गलती को सुधारने के लिए सारी कवायद की जाती है और महीनों परिश्रम किया जाता है सुधार के बाद जिला प्रशासन के द्वारा जारी फोटो मतदाता सूची वही गलती रह जाती है और ऐसा किसी तकनीकि गलती की वजह से नहीं रहती बल्कि जिसके द्वारा इस कार्य को अंजाम दिया जाता है वह जानबूझ का गलती को सुधारना ही नहीं चाहता। ऐसा इसलिए कि निविदा के आधार पर चलने वाले इस काम को यदि सुधार कर ठीक कर दिया जाएगा तो फिर उनका काम बन्द हो जाएगा। निविदा पर काम करने वाले की इस मानसिकता की वजह से ही लगातार तीन बार मतदाता फोटो सूचि सुधारने का काम किया गया है पर नतीजा शिफर ही रहा। निर्वाचन आयोग के द्वारा चलाए जा रहे फोटो युक्त सूची बनानेके इस अभियान को निवाद पर काम करने वालों के द्वारा टांय टांय फिस्स कर दिया जा रहा है। इतना ही नहीं इसको लेकर ंशुक्रवार को हुए मतदाता सूची सुधारने की बैठक में शिक्षकों ने अपना रोष जताया। सुधार कर जो सूची जिला के द्वारा जारी किया गया उसमें किसी तरह का परिवर्तन नहीं किया गया है। महिला के नाम की जगह पुरूष का तस्वीर तथा पुरूष के नाम की जगह महिला की तस्वीर चस्पा कर दिया गया है। इतना ही नहीं एक ही तस्वीर को 12 नामों के जगह लगा दिया गया। बहरहाल यह कवायद एक बार फिर से चलाया जा रहा है पर बीएलओं को इस आर लोगो के गुस्सों को झेलना पर रहा है पर इसका आसर कुछ नहीं दिखता।






06 अप्रैल 2010

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया।

दन्तेबाड़ा में नक्सलीयों ने अपने एक और विभत्स रूप का परिचय देते हुए 74 जवानों को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना कें बाद जहां गृहमन्त्री मुंहतोड़ जबाब देने की बात कह रहे है वहीं शहीद जवानों की इस तरह हो रही हत्या की जिम्मेवारी लेने वाला कोई नज़र नहीं आता। गृहमन्त्री चिदबरंम मिडिया कें माध्य से हमेशा यह बयान देते रहे है कि नक्सलीयों निवटा जाएगा पर 81 जवानों को सुनियोजित तरीके से घेर कर 74 जिस तरह हत्या कर दी और उनके  हथियार लूट लिए गए लगता है कि गृहमन्त्री महज जुबानी जमा खर्च के सहारे नक्सली से निवटने की बात करते है। यदि ऐसा नहीं तो धंटों चले इस मुटभेड़ में कोई सहायाता नहीं पहूंचना और 1000 हजार नक्सली को गुम हो जाना क्या बताता है।  क्या ऑपरेशन ग्रीनहंट  जवानों को शहीद करने के लिए चलाया गया है। 

05 अप्रैल 2010

दलित टोले के स्कूल भवन को बनने नहीं दे रहे गांव कें ही दबंग.

शेखपुरा-दलितों के विकास को लेकर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बात भले ही कही जाती रही हो पर दूर-दराज के गांवों में आज भी दलितों के हितों की बात सुन कर गांव कें ही सम्पन्न लोग इसका विरोध करने लगते है। ऐसा ही एक बाकया हुआ है जिले के घाटकोसुम्भा प्रखण्ड कें सहरा गांव में। इस गांव में विद्यालय भवन बनाए जाने की स्वीकृत तीन साल पूर्व ही सर्वशिक्षा अभियान के तहत हो गई थी पर तीन साल के बाद आज तक यहां भवन नहीं बन सका वह भी गांव के ही दबंग ग्रामीणों के विरोध की वजह से। मामला इतना  बढ़ गया की हार कर दलितों ने आज समाहरणालय पर विद्यालय भवन बनाने को लेकर प्रदशZन किया तथा जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। 
सहरा गांव दूर दराज टाल ईलाके में बसा हुआ है यहां आज तक विकास की रौशनी नहीं पहूंची है। यह गांव पिछड़ों की बहुलता बाला गांव है और साथ ही कुछ घर दलितों के भी है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत यह विद्यालय भवन बनाए जाने की बात हुई और उसकी स्वीकृति  भी हो गई और ठेकेदार यहां भवन बनाने के लिए भी गया पर पिछड़ी जाति के लोग यह जानकर भड़क गए कि दलितों कें  टोले में विघालय बनेगा और गांव वालों ने मिलकर तीन बार ठेकेदार को खदेर कर भगा दिया और स्कूल भवन दलितों के टोले में नहीं बनने देने की बात पर अड़े हुए है।

02 अप्रैल 2010

सानीया और शोएब की शादी टुटने में कितना वक्त लगेगा?


सानीया मिर्जा ने जब से शोएब मिल्लक से शादी की बात कही है हंगामा मच गया। नौजावानों को तो खैर हक है हंगामा करने का पर अस्सी के दद्दू भी हंगामा कर रहें है। करना भी चाहिए, आखीर सानीया ने एक बार भी नहीं सोंच की पाकिस्तान हमारा दुश्मन देश है और भारत की सेलिब्रेटी होकर भी उसने पाकिस्तानी से शादी करने की सोच ली। पर बात इतनी नहीं है। सानीया चाहे पाकिस्तानी से शादी करती या भारतीय से लोगों को क्या मिलना था। पर जनाब लोग तो दिवानें होते है और वे किसी के भी फटे में टांग अड़ाना खुब जानते है। लोगों को पता है अब सानीया की तस्वीर कम्प्यूटर के स्क्रीन से लेकर मोबाइल तक पर लगाने में उनको मजा नहीं आएगी। सानीया का बॉलपेपर अभी नंबर एक पर है। सानीया टेनीस में भले ही नंबर एक पर न पहूंच सकी पर बॉलपेपर के मामले में वह एक नंबर में है। सानीया को मिडिया में सनसनी कहा जाता है और इसे वह सच्चा भी साबित कर रही है तभी तो पहले उसने अपने बचपन के प्रेमी से अपनी सगाई तोड़ कर सनसनी मचाई और उसके बाद पाकिस्तानी से ंशादी की बात कह कर सनसनी मचा दी। हलांकि सानीया की सनसनी युवतियों में भी खुब है अरे उसकी नथ सनसनी से कम है क्या युवतियां इसकी दिवानी हो गए और युवक तो दिवने होते ही है।
सारी बात समझ में आती है, नैजवानों का हंगामा करना, नथ की सनसनी पर एक बात जो मेरे समझ में नहीं आती वह यह कि भैया नेता लोग इसपर हंगामा क्यों कर रहें है। अपने ठाकरे साहब इस उर्म में सानीया को लेकर हंगामा कर रहें है। कह रहें है भारत में नैजवान नहीं है क्या जो पाकिस्तान चली गई। दद्दू भारत में नौजबान होते तो आप क्यों हंगामा करते नैजावानों को करने दिजिए न।  और भैया सरहद की बात तो सियासतदां ही जाने दो दिलों के बीच यह कभी दिवार नहीं बनी है और सरहद पार दिल लगी तो आप इसे दिल्लगी मान रहें है। एक पते ही बात बता रहा हूं, जब बचपन के साथी से सगाई तोड़ने में वक्त नहीं  लगा तो पाकिस्तानी से शादी तोड़ने में कितना वक्त लगेगा। इसलिए दिल थाम कर बैठिए और शोएब को अराम से बॉलीबॉल का आनन्द लेने दिजिए।
सानीया कहां शादी करे कहां घर बसाए और कहां से टेनीस खेले उसको सोचने दो न, सब उंगली करने में क्यों तुल गए हो। सानीया पाकिस्तान ही में बस जाए तो हमारा क्या जाएगा। छोड़ दो भैय्या छोड़ दो.........



01 अप्रैल 2010

रजाई ओढ़ कर घी पीती भाजपा...

बिहार में भाजपा के  द्वारा दोहरी राजनीति की जा रही है। एक तरफ तो इसके मन्त्री मन्त्रिमण्डल में फैसले पर मुहर लगाते है और दूसरी तरफ इसके नेता सड़कों पर उतर कर विरोध करते है। भाजपा की यह दोहरी राजनीति नहीं तो क्या है कि अलिगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का शाखा किशनगंज में खोले जाने के बिहार सरकार के फैसले का विरोध करते हुए भाजपा के नेताओं के ईशरे पर विद्यार्थी परिषद के द्वारा  आज बिहार बन्द के दौरान हंंगामा और तोड़ फोड़ किया गया। विद्यार्थी परिषद के लड़कों को क्या यह नहीं मालूम की उसके ही पार्टी के मन्त्री और विधायकों ने यह काम मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति के तहत की है और अब जनता को भ्रमाने के लिए सड़कों पर तोड़ फोड़ कर जनता का ही नुकसान कर रही है। बुरा हो ऐसे राजनीतिज्ञों का जो इस तरह का दोहरा चरित्र तो रखतें है और सोचते है कि किसी को पता भी न चले। जनाब भाजपाईयों दम है तो सरकार को गिराने की बात कर बिल को रोबाओं या रजाई ओढ़ कर घी पीते रहना है। पर भैया सावधान पब्लिक है सब जानती है.............

अथ श्री एक्सप्रेस ट्रेन शौचालय कथा भाया बुलेट ट्रेन

अथ श्री एक्सप्रेस ट्रेन शौचालय कथा भाया बुलेट ट्रेन अरुण साथी पटना से सूरत, दिल्ली, पंजाब , मुंबई एक्सप्रेस का स्लीपर डिब्बा खचाखच भरा हुआ...