04 मई 2017

फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा ( व्यंग्य)

फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा
(Twitter @arunsathi)

चाची ऑनलाइन कंपनियों पर बहुत गुस्से में थी। पांच हजार की जींस उनके बेटे ने खरीदी और फटा हुआ जींस भेज दिया। चाची कह रही थी "देखोहो बउआ, की जमाना आ गेलइ, रुपैया नगद लेलकै अउ फटल जींस भेज देलकै!" उधर मेरी बंदरी भी गुस्से में है। कई दिनों से दूध फट जा रहा है। बंदरी कहती है कि जरूर यह दुश्मन का काम है। इधर मेरा भी मोबाइल हैंग करने लगा है। मुझको भी शक है कि यह विरोधियों की साजिश है। और तो और भैय्या रामखेलाबन नाराज है कि जेठ के महीने में इतनी गर्मी क्यों है। ई भगवान भी उम्ताहा है..!

भाई जमाना फैशन का है सो आरोप लगा के गाली देने में क्या जाता है। कुछ प्राणी कमेन्ट के रूप में भुकने ही लगेंगे। गारंटी है। तो फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा पूरी हुई न...!

फैशन का सबसे बड़ा नजारा हम चुनाव में देखते हैं। चुनाव आते ही नोट का खेल वोट के लिए शुरू हो जाता है। लाखों - करोड़ों खर्च करते हैं नेताजी और यह पैसे हम पर ही खर्च होते हैं। चुनाव के दिन पार्टियों के कार्यालय में रुपए लेने के लिए नाराज होते, गुस्सा करते हुए नेताओं-कार्यकर्ताओं और वोटरों को देखा जा सकता है। जिनका जितना कद उनकी उतनी माँग!

नेता जी से हम पैसा ऐसे मांगते हैं जैसे उनको रखने के लिए दिया हो और नेताजी भी पैसा इसी तरह से खर्च करते हैं जैसे "एक लगाओ, लाख पाओ" के लिए खर्च कर रहे हो। एक-एक वोट के हिसाब से हम जोड़कर पैसा लेते हैं। यह फैशन है और बावजूद इसके हम नेता जी की ईमानदारी, जनसेवा, विकास की गारंटी की इच्छा करते हैं, यह भी फैशन है!

चलिए, बात महज नेताओं की क्यों हो गारंटी की इच्छा आजकल इलेक्ट्रॉनिक न्यूज़ चैनलों और सोशल मीडिया पर कुछ अधिक ही देखने को मिल रही है। बहुत आसान सा फैशन है, फैशन के दौर में गारंटी की इच्छा करते हुए लोग मां बहन एक कर रहे हैं और उनकी गारंटी की इच्छा कॉमेंट देने वाले पूरा कर देते हैं वह पॉपुलर भी हो जाते हैं, बहुत आसान सा फंडा है।

फैशन का दौर है, अब हम अपने घर में गौमाता तो रखते नहीं, सड़क पर खुले छोड़ दी गयी भटकती हुई बेचारी और लाचार गाय को एक-दो डंडे भी मार देते हैं। यही आज कल का फैशन है। पर देखिए, हमारी गारंटी की इच्छा। गौरक्षा के नाम पर हम कितने क्रांतिकारी हो जाते हैं। आदमियों को भी मार दे रहे हैं!

और देखिए, भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में एक दूसरे के खिलाफ जहर उगलने वाले नेताओं को हम सर आंखों पर बिठा लेते हैं! जय जयकार करने लगते हैं! यही फैशन है! और हम गारंटी की इच्छा क्या करते हैं, यही ना कि बॉर्डर पर हमारे सैनिक शहीद ना हो, आतंकवाद के नाम पर हम और आप मारे नहीं जाएं! चरण वंदन आपको महाराज!!

फैशन का दौर है, हम अपने बेटे को बोर्डिंग स्कूल में तब से ही भेज देते हैं जब वह ठीक से पोट्टी करना भी नहीं जानता! कौन जहमत मोल ले। पैदा होते ही इंजीनियर, डॉक्टर देते हैं और गारंटी की इच्छा यह करते हैं कि बड़ा होकर हमारा बेटा आदमी बने, मां-बाप की सेवा करें, सामाजिक बन जाए! चलिए इच्छा करने में क्या जाता है, फैशन का दौर है, बृद्धा आश्रम में ठौर है!!

और देखिए, लड़कियों को छेड़ने वाले,  उचक्के, लफुये, लूटरे-ठग सोशल मीडिया पर तथाकथित अपने-अपने धर्मों के लिए ऐसे-ऐसे पोस्ट देते हैं जैसे वे धार्मिक पुस्तकों के प्रकांड विद्वान हो और तप-तपस्या करके ही दिव्य ज्ञान प्राप्त किए हो! उनके धार्मिक (अधार्मिक) पोस्ट को हम ऐसे शेयर और कमेंट करते हैं जैसे यह दिव्यज्ञान से ही प्राप्त किया गया हो और हमारी गारंटी की इच्छा है कि समाज और देश में आपसी भाईचारा बढ़े, प्रेम बढ़े!! लोग धार्मिक बने!

खैर, फैशन का दौर है गारंटी की इच्छा तो रखनी भी चाहिए। ठीक उसी तरह , जैसे हमने केजरीबवाल से गारंटी की इच्छा रखी थी और उनके जलसे में जय जय करने लगे थे। आलम यह है कि एक-एक कर बिछड़े सभी बारी बारी हो गए और एक मैं ही  सही, सारे लोग भ्रष्टाचारी हो गए। अन्ना तक को गाली देने लग गए!

या यूं कहें कि ठीक वैसे ही जैसे, अच्छे दिन लागे, भ्रष्टाचार मिटाने, एक सर के बदले दस सर काटकर लाने की गारंटी देने वाले का जयकार हम करने लगे थे!
फैशन का दौर है गारंटी की इच्छा करने में क्या जाता है। जैसे बिहार में शराबबंदी के बाद पूरी तरह से शराब नहीं बिकने की गारंटी दी गई थी। या की ठीक वैसे ही जैसे, नोटबंदी के बाद भ्रष्टाचार, काला धन खत्म हो जाने की गारंटी दी गई थी! अब आप देखिए और समझिए कि आपके गारंटी की इच्छा पूर्ण हुई या नहीं! फैसला आपका है, क्योंकि वोट आप देते हैं! मैं कौन होता हूं तीन  में तेरह बनने वाला!!



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